ब्राह्मण शंख बजाएगा…UP में किसे जिताएगा ? सबको याद आए ब्राह्मण…बदलेगा UP का सियासी रण ?

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ब्राह्मण शंख बजाएगा…UP में किसे जिताएगा ? सबको याद आए ब्राह्मण…बदलेगा UP का सियासी रण ?
फ़िर से चर्चा की शुरुआत कर लेते हैं और सवाल यही है कि क्या इस बार ब्राह्मण kingmaker की भूमिका दो हज़ार बाईस में निभाने वाले हैं। तमाम ख़ास मेहमान मेरे साथ बने हुए हैं। ah, और जल्दी से मैं आपके पास आती हूँ Satish जी लेकिन एक reaction में ah, अब मेरे सहयोगी जुड़े हुए हैं Ashok Tiwari Lucknow से उनसे ले लेती हूँ। Ashok Tiwari ब्राह्मणों की क्या स्थिति Uttar Pradesh में है आप जाते भी हैं बातचीत करते हैं क्योंकि सभी पार्टियों का focus ब्राह्मणों पर है। देखिए इस बात में कोई संदेह नहीं है कि उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण राजनीति में बहुत अहम भूमिका निभाते हैं चूँकि सिर्फ ब्राह्मण वोट नहीं करते बल्कि ये माना जाता है कि कई जातियों को अ प्रभावित करते हैं वोट करने में. हम्म. और यही वजह है कि उत्तर प्रदेश में तमाम सारी पॉलिटिकल पार्टीज चाहे बहुजन समाज पार्टी हो, समाजवादी पार्टी हो, कांग्रेस हो, बीजेपी हो ये समय-समय पर कोई ऐसे कदम उठाते हैं जिससे कि खासकर अ ब्राह्मण वर्ग में ये मैसेज दिया जा सके कि ये पॉलिटिकल पार्टी उनकी हितैषी है. हम्म. आप देखिए कि जब शुरुआती दौर में बीएसपी ने सबसे पहले ब्राह्मण सम्मलेन की शुरुआत की और तकरीबन तकरीबन आप कड़ कि पूर्वांचल के बहुत सारे जिलों को उन्होंने अभी तक कवर भी किया है उसके बाद समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कुछ ब्राह्मण नेताओं के साथ पार्टी के ऑफिस में बैठक भी की थी जिसमें खुद प्रोफेसर अभिषेक मिश्रा जी भी मौजूद थे उसमें माता प्रसाद पांडे जो कि पूर्व विधानसभा अध्यक्ष हैं इसके अलावा सनातन पांडे समेत तमाम सारे जो समाजवादी पार्टी के ब्राह्मण चेहरे माने जाते हैं उनको उस बैठक में बुलाया गया था और उस दिन भी ब्राह्मणों की को लेकर खास तौर पर रणनीति की तय की गई थी चर्चा की गई थी कि उत्तर प्रदेश में सम्मलेन आयोजित किए जाएं लेकिन ये जरूर है कि चूँकि कोर्ट का रोक है इसलिए इस सम्मलेन ब्राह्मण सम्मेलन नहीं कहा जाएगा पिछली बार भी जब समाजवादी पार्टी की सरकार थी तो उस वक्त भी तमाम तरह के सम्मलेन आयोजित किए गए थे. मैंने खुद उसको समाजवादी पार्टी में कवर किया था. उसको प्रबुद्ध वर्ग सम्मेलन नाम दिया गया था. और अ मुझे लगता है वो पहला मौका था जब समाजवादी पार्टी ऑफिस के अंदर शंख बजाए गए थे. तमाम सारे धर्म गुरु उस दिन पॉलिटिकल आ जो समाजवादी पार्टी का दफ्तर है वहाँ पर मौजूद थे खुद मुलायम सिंह यादव जी उसकी अध्यक्षता कर रहे थे अखिलेश यादव जी भी वहाँ मौजूद थे. तो ये कोशिश जरूर की जा रही है तमाम सारी पॉलिटिकल पार्टीज की तरफ से कि खासतौर पर जो ब्राह्मण वर्ग है जो कि आप कह सकते हैं माना जाता है कि वो एक खुद वोट नहीं करते बल्कि और दूसरे जो कास्ट है उनको वोट करने के लिए प्रभावित भी करते हैं एक माहौल बनाते हैं. हम्म. तो फिलहाल उनको अपने पक्ष में लामबंद करने के लिए ये पूरी कवायत देखी जा रही है. बीएसपी का ब्राह्मण सम्मलेन लगातार चल रहा है और समाजवादी पार्टी का भी सम्मलेन शुरू होने वाला है. हालांकि नाम ब्राह्मण नहीं ब्राह्मण समाज को पार्टी इस बात को ना माने आप खुलकर कि वो जातिगत सम्मलेन सम्मलेन को लेकर. वो बदल देंगे नाम को. मैं आ रही हूँ. राजीव एक छोटा सा रिएक्शन मैं चाह रही हूँ और उसके बाद जल्दी से मैं सतीश जी के पास आउंगी. राजीव ये मेरे पास सीट के हिसाब से ही संभावित voting percentage है जिसमें दो हज़ार उन्नीस चौदह और सत्रह तीनों में ब्राह्मणों की पसंद BJP रही है तो क्या दो हज़ार बाईस में एक खिलाफ माहौल बनाने की भी कोशिश की जाएगी क्योंकि तमाम विपक्षी पार्टियाँ ये कह रही है कि दुर्गति हुई है ब्राह्मणों की Uttar Pradesh में जो वादे किए गए उस हिसाब से BJP ने काम नहीं किया और ऐसा था तो फिर BJP क्यों पसंद रही देखिए एक बात तो ये है कि किसी एक अ जाति को या किसी एक धर्म को ये कहना कि वो इसी तरफ उसका झुकाव है ऐसा सौ फीसदी नहीं होता है. बहुमत जिधर जाता है उसको हम मान लेते हैं. दूसरी बात है कि कोई भी पोलिटिकल पार्टी जो ब्राह्मणों के बारे में आप बात कह रही हैं देखिए दो हजार सत्रह उन्नीस सौ चौदह चौदह और उन्नीस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का चुनाव था और ऐसा कहना कि उनको इस जाति का इस जाति का समर्थन मिला नहीं उनको बहुत सी जातियों का समर्थन मिला अदर बैकवर्ड क्लास जो उत्तर प्रदेश में बहुत मजबूत स्थिति के वोटर हुआ करते थे और वो बीजेपी की तरफ पिछले बीस सालों में कभी नहीं गए, प्रधानमंत्री ٹھیک ہے راجیب میں آتی ہوں کچھ آڈیو میں پرابلم ہوئی ہے لیکن اب ستیش پروکاسٹری آپ کے پاس آ رہی ہوں دیکھیے کیا? جو بی ایس پی نے شروعات کی تو آپ مانتے ہیں کہ سماج آبادی پارٹی بھی آپ کے نقش قدم پر چل پڑی ہے दल को अपनी बात कहने का अधिकार है नहीं ये हमारा मानना ये है कि कोई भी सामाजिक रूप से कमजोर हो चाहे राजनीतिक रूप से कमजोर हो उस कमजोर की आवाज हम बने उस कमजोर के दर्द को हम सरकार के सामने रखें ये सच है कि जब से बीजेपी की सरकार आई है उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण समाज को लेकर के जिस तरह से राजनीतिक चालबाजी चली जा रही है और उनको एक जाति विशेष को आगे बढ़ाने के लिए ब्राह्मणों को जिस तरीके से पीछे किया जा रहा है और आप ये भी देखेंगे योगी जी के ऊपर ये आरोप नहीं है कि कहीं ना कहीं सरकार का एक नजरिया दिखाई देता है कि अपराध ख़तम करने के नाम पर योगी जी ने जिस तरीके से चुन-चुन के पूर्वांचल के ब्राह्मण समाज जो एक राजनीतिक ताकत है. इसमें कहीं कोई दो राय नहीं है. अभी राजीव जी ने यही बात खोली है. कि ब्राह्मण एक सिर्फ एक वोट नहीं है. वो एक ताकत है. और ये माहौल भी सच है कि दो हजार सत्रह में इन्हीं ब्राह्मण समाज के लोगों ने बीजेपी को वोट दिया था. बीजेपी बीजेपी को सत्ता में पहुँचाया. हम्म. अब ये नैतिक जिम्मेदारी है. बीजेपी की भी नैतिक जिम्मेदारी है. और बीजेपी को हम उसकी नैतिकता भी याद दिला रहे हैं. हम्म. अगर वो वोट आरती है लोगों का तो सारे अब योगी जी किसी एक जात विशेष के मुख्यमंत्री तो है नहीं ना हं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री होने के नाते उनको सब वर्गों की के हितों की रक्षा करनी चाहिए और ये सच है ये आप मान लीजिए कि जाति अगर जन्म से है तो जाति को आप इग्नोर नहीं कर सकते और देश में सबसे बड़े सदन में अगर देश के प्रधानमंत्री जाति शब्द लाइए ही मत अपनी जुबान पर सिर्फ विकास की बात नहीं सुनिए सुनिए देखिए बोलिए Manish जी आप जवाब देना चाहेंगे क्योंकि Samajwadi Party और BSP दोनों ही आप पर ये आरोप लगा रहे है कि आपको vote की तो चिंता है लेकिन जो वादे आपने किए थे इस वर्ग के लिए काम नहीं किया आपने Uttar Pradesh में बारह से सत्रह के बीच अखिलेश यादव जी मुख्यमंत्री रहे उसके पहले मुलायम सिंह यादव जी भी मुख्यमंत्री रहे. लोक सेवा आयोग की जब लिस्ट निकलती थी तो चार-पाँच जिलों के चंद चंद लोग उसमें जगह पाते थे. जो पोस्टिंग्स होती थी वो भी लोगों ने देखा है. किस तरीके से जाति और धर्म का नंगा नाच होता था समाजवादी पार्टी के समय में और आज जब चुनाव आया है तो एक गाड़ी में यानी अ अगर आप मारुती लीजिए तो वो पांचो ब्राह्मण नेता जिनको दिखा के समाजवादी पार्टी लुभाना चाहती थी. एक मारुती में आ जाएंगे समाजवादी पार्टी के उस वर्ग से और अभी बसपा जो कह रही थी यानी अ सतीश जी अब हम लोग इस बात को मान लें कि तिलक तराजू और तलवार में जैसे तिलक के ऊपर हमला नहीं करेंगे आप लोग. उनके साथ तो जो नारा आपने किया था वो उससे वापस लौटेंगे. तिलक तराजू और तलवार अगर मीडिया में इस वीडियो में बहन जी ने इस तरह का नारा लगाया तो आप रखिए. सुनिए सुनिए ब्राह्मण पीड़ित है आप मान्यवर कि जितनी जिसकी संख्या अभी हम किसान पाँच सेकंड पाँच सेकंड मुझे कंप्लीट कर लेने दीजिए. और अभी अगर आपके मन में इतना प्यार था. तो हमने तो कभी नहीं सुना कि ब्राह्मणों इकट्ठे हो जाओ. दो हजार उन्नीस के चुनाव में सहारनपुर में मायावती जी अखिलेश यादव की मौजूदगी में किसको एकत्रित कर रही थी? कि मुसलमानों इकट्ठे हो जाओ. भाजपा को हराना है. तो ये जो आपका चेहरा है जनता जानती है. जात और धर्म की राजनीत मत करिए सतीश जी विकास की बात करिए हमारी पाँच साल की सरकार चली है हमसे हमारा काम पूछिए हम रिपोर्ट कार्ड रखेंगे उसके आधार पे जनता के सामने जाएंगे आशीर्वाद के लिए और अभिषेक जी कुछ कहना चाह रहे हैं आप किसी बात पर रिपोर्ट कार्ड का आपने जिक्र किया तो अभिषेक जी ने उंगली उठा दी बोलिए अभिषेक जी दो चीजें हमें ध्यान देनी चाहिए जो भारतीय जनता पार्टी कह रही है यहाँ बैठ के एक मैं चाहता हूँ आपके माध्यम से पूरा हिंदुस्तान सुन रहा हो कि जब चर्चा ब्राह्मण पे हो रही थी तब भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता बार-बार मुसलमान बीच में ला रहे थे. तो इनकी पुरानी आदत है सिर्फ इन्होंने नहीं किया इनके शीर्ष नेतृत्व ने उत्तर प्रदेश जब चुनाव लड़ने आते हैं तो हिंदू-मुसलमान की बात करते हैं, मंदिर-मस्जिद की बात करते हैं, कब्रिस्तान और शमशान की बात करते हैं. रमजान और दिवाली की बात करते हैं. इन्हें कहीं ना कहीं ये व्हाट्सएप पे मैसेज आ जाता है डिबेट के बीच में. कि भाई मुसलमान का मुद्दा नहीं लाए आप. आप मुसलमान का मुद्दा नहीं लाए. आप मुसलमान ला दो जिससे कि देश को लड़ाया जा सके उस पे. पहली बात. दूसरा आपने काम की बात कि आप हमारे व्हाट्सएप पाँच सेकंड आप पाँच सेकंड कह रहे थे ना पाँच सेकंड सुनने का धैर्य रखिए मनीष जी मैं चुप हो जाता हूँ आप बोलिए. कि प्रोफेसर अभिषेक मिश्रा की बात दो हजार सत्रह में किसने की थी वो तो आपको मालूम है इसका जिक्र छोड़ दीजिए आप नहीं नहीं ये शमशान और कब्रिस्तान का मुद्दा बड़ा हो गया था दो हजार सत्रह में किसने की थी आप पता कर लीजिएगा आपके पास रिकॉर्ड होगा आपने चलाया भी था उस समय किसने की थी? इनकी शीर्ष नेतृत्व ने की थी हम बताते हैं ना अब जो रिपोर्ट कार्ड की बात कर रहे हैं इनसे ये पूछ लीजिए कि क्या आपके चैनल ने न्यूज़ ट्वेंटी फोर ने कभी नहीं चलाया कि कितनी मौतें हुई उत्तर बिना ऑक्सीजन के और भारतीय जनता पार्टी ये कैसे कह सकते हैं कि न्यूज़ ट्वेंटी फोर ने नहीं दिखाया. न्यूज़ ट्वेंटी फोर ने हर एक आंकड़े को दिखाया है. हर राज्य की तस्वीर दिखाई है. इसमें ये मत कीजिए कि हमने उत्तर प्रदेश को अलग कर दिया. ये गलत कह रहे हैं आप? मैं तो आपके हक़ में बोल रहा था. मैंने यही कहा कि आपने भी दिखाया है. हं. आपने लगातार वो आपने अच्छा किया आपने मेरी बात कन्फर्म कर दी. कि आपने दिखाया है मैं भी यही कह रहा था आपने लगातार दिखाया है. और भारतीय जनता पार्टी का शीर्ष नेतृत्व पार्लियामेंट में कह रहा है कि देश में एक भी आदमी की मौत ऑक्सीजन की कमी से नहीं हुई. आप बताओ जो आपने या अगर गलत दिखाया हो तो आप बता दो आपने अभी-अभी कहा कि मैंने दिखाया है. जो हालात प्रदेशों में बने हुए थे वो हमने सब दिखाया. रिपोर्ट कार्ड? जी जी बिल्कुल मैं इनके रिपोर्ट कार्ड पे आ रहा था. इनका रिपोर्ट कार्ड आपको लेना है तो आज उत्तर प्रदेश से उन परिवारों मौत के नहीं अभी नहीं हुआ आप इंतजार करिए. फिर वो रिपोर्ट कार्ड पे आई ही नहीं. अभी आने तो दीजिए. अभी तो आपको सिर्फ मैंने ये बताया कि जहाँ चर्चा ब्राह्मण पे थी वहाँ आप हिंदू-मुसलमान की बात कर रहे हैं बैठ के. हुजूर सुनने का जज्बा तो रखिए अभिषेक जी जल्दी कम्पलीट कीजिए जीडीपी की जीडीपी की ग्रोथ नीचे है चार बार बिजली के दाम बढ़ा चुके है ठीक है कि बिजली की मांफी खत्म कर दी रोजगार के लिए नौजवान रोज पिट रहा है एम्बुलेंस के ड्राइवर्स की फीस नहीं दी इन्होने ठीक है ये हो गया है आपने कहा महिलाओं पे अत्याचार ब्राह्मणों की अनदेखी की कोरोना ने संभाल नहीं पाए ये सब आप गिरा चुके है मनीष जी जल्दी से बोलिए फिर एक आखिरी रिएक्शन मुझे लेना है जल्दी से अपनी बात रखिए देखिए अभी श्मशान कब्रिस्तान की बात हो रही थी. दो चीजें मैं फैक्ट बता रहा हूँ. तथ्य बता रहा हूँ. उसमें मिनिस्टर थे. उस सरकार में जिसमें ये तय हुआ था. मेरी बेटी उसका कल ये योजना अभिषेक जी आपकी सरकार लेकर आई थी और आप कैबिनेट के मिनिस्टर थे. केवल मुसलमान लड़कियों को लेकर के लेकर आई थी. तब आप कहाँ थे? आप कहाँ चले गए थे? तब आपको ब्राह्मण अशोक तिवारी रिपोर्टर एक खड़े हैं लखनऊ में रहते हैं. नहीं ठीक है ऐसे नहीं एक-एक करके बात करेंगे राजीव आखरी कमेंट आपका. जो आप बात कह रहे थे कंप्लीट नहीं हुई थी. चलिए Rajiv से भी संपर्क नहीं हो पा रहा है लेकिन आप देख रहे है कि चर्चा ऐसे ही चलती रहेगी क्योंकि कोई भी party ये नहीं मानेगी कि हम जाती के आधार पर राजनीति करते है जब ये सवाल पूछा जाता है तो सब विकास की बात करने लगते है और एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप का दौर तो लंबा चलता ही है वक्त की कमी है आप सभी का बहुत बहुत शुक्रिया नमस्कार मैं हूँ मानक गुप्ता. अगर आपको हमारा ये वीडियो पसंद आया हो तो इसे लाइक और शेयर जरूर करें. और हाँ हमें सब्सक्राइब और फॉलो करना ना भूलें. ताकि आप देश और दुनिया की कोई खबर मिस ना करें. तो जुड़े रहिए हमारे साथ और देखते रहिए न्यूज़ ट्वेंटी फॉर.

Posted 2 months ago in Politics