देश प्रदेश: लोक जनशक्ति पार्टी में बगावत, चिराग पासवान अलग-थलग पड़े

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लोक जनशक्ति पार्टी में बगावत हो गई है. पार्टी के लोकसभा में छह सांसद हैं जिसमें से पांच सांसदों ने बगावत कर दी है. पार्टी के अध्यक्ष सांसद चिराग पासवान...
नमस्कार देश प्रदेश में आपका बहुत-बहुत स्वागत है. दिल्ली से मैं हूँ शरद शर्मा और मेरे साथ मुंबई से जुड़ रहे हैं मेरे सहयोगी सोहित मिश्रा लोक जनशक्ति पार्टी में बगावत हो गई है. पार्टी के कुल लोकसभा में छह सांसद हैं लेकिन पाँच सांसदों ने बगावत कर दी है. और पार्टी के अध्यक्ष सांसद चिराग पासवान अकेले रह गए हैं. इस मामले पर पूरे दिन क्या हलचल रही? ये जानने के लिए चलते हैं मेरे सहयोगी राजीव रंजन के पास. कभी नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री ना बनने देने की कसम खाने वाले चिराग पासवान अब अपने पार्टी में ही अकेले पड़ गए हैं. उनकी पार्टी में हो गई है. अब उनको छोड़कर पाँच सांसद उनसे अलग हो गए हैं. अब चिराग की जगह उन्होंने अपना नया नेता उनके चाचा पशुपति कुमार पारस को चुन लिया है. यही नहीं इन पाँचों सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष को चिट्ठी भी लिखी है कि इनको अलग गुट के तौर पर मान्यता दी जाए. मान मनोवल करने के लिए चिराग अपने चाचा के घर गए लेकिन उनसे मुलाकात तक नहीं हो पाई. Lok Janshakti Party में अलग थलग कर दिए गए Chirag Paswan सोमवार दोपहर से पहले अपने चाचा और Hajipur से सांसद Pashupati Kumar Paras से मिलने उनके घर पहुँचे करीब दो घंटे इंतज़ार करते रहे मुलाकात नहीं हुई इससे पहले LJP के Baaghi गुट के नेता Pashupati Kumar Paras ने press conference कर ऐलान किया कि party सांसदों ने Chirag Paswan से अलग होने का फैसला किया है कोई शिकायत नहीं है सिर्फ कि मैं पार्टी थोड़ा नहीं हूँ पार्टी ओरिजिनल पार्टी पार्टी है पार्टी रहेगी इसमें चिराग पासवान जी आ रहे हैं ये सारा खेल वैसे रविवार को ही पूरा हो चुका था जब पार्टी के पांच सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मिलकर चिराग की जगह पशुपति कुमार पारस को नेता बनाने की मांग की सांसदों का मानना है कि चिराग ने नितीश को निशाने पर लेकर पार्टी का काफी नुकसान किया है मेरे लिए तो मेन वजह वो हुआ पारस जी जैसे एक्सपीरियंस आदमी को बिहार से अ बिहार प्रदेश अध्यक्ष हटाना वो भी एक गलत strategy रहा जानकार मान रहे है कि इस टूट के पीछे JDU का हाथ है हालांकि JDU इसे लोजपा का अंदरूनी मामला बता रही है sir इसके पीछे JDU को कोई हाथ नहीं हम लोग NDA के साथ रह के चुनाव लड़ना चाहते है Bihar में काम करना चाहते है जिस प्रकार से LJP के नेता श्री Chirag Paswan ने NDA को कमजोर करने का प्रयास किया जिसके रहते ND का भी संख्या बल कम हुआ और एलजीपी लगभग समाप्ति की तरफ चली गई. ये उससे उत्पन्न हुई निराशा है कुंठा है और गुस्सा है. वैसे चिराग से अलग हुए गुट ने एनडीए के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई है. केंद्र के मंत्रिमंडल विस्तार पर सबकी नजर है. लेकिन सवाल है अगर जेडीयू इन बागी सांसदों के पीछे है तो बीजेपी चिराग को अहमियत देगी या बागी सांसदों को बिहार सभा चुनाव में नितीश कुमार के खिलाफ आग उगलते चिराग पासवान को बीजेपी की सह हासिल है ये बात सब मानते रहे. उधर बिहार में जेडीयू और बीजेपी के बीच अंदरूनी टकराव जारी है. अब ये देखना दिलचस्प हो सकता है कि लोक जनशक्ति पार्टी के टूट का बिहार के राजनीतिक समीकरण पर क्या असर पड़ता है. पटना से मनीष कुमार के साथ नई दिल्ली में जे बीएर कमल के साथ राजीव रंजन, एनडीटीवी इंडिया. अयोध्या में बारह हजार अस्सी square meter में फैली हुई अमरूद की बाघ देखने में तो आम बात जैसी लग रही है लेकिन आज ये हिंदुस्तान में एक बहुत बड़े विवाद का केंद्र बनी हुई है इस वजह से कि इस जमीन को पहले दो करोड़ रुपए में किसी ने registry कराई और उसके चंद मिनटों के बाद साढ़े अठारह करोड़ रुपए में इसको Ram Janmabhoomi trust ने खरीद लिया Ayodhya से ही Samajwadi Party के विधायक और मंत्री रहे Pawan Pandey ने ये मुद्दा उठाया दिलचस्प ये है कि अठारह March को जब ये बाघ Harish Pathak और Kusum Pathak ने दो करोड़ में Sultan Ansari और Ravi Mohan Tiwari को बेची तो उसमें Ayodhya के Mayor Rishikesh Upadhyay और Ram Janmabhoomi trust के member Anil Mishra की गवाही है और चंद मिनटों बाद जब Ram Janmabhoomi trust को साढ़े अठारह करोड़ में registered agreement किया गया तो उसमें भी वही गवाह है तो मेरा पहला सवाल है कि अचानक ऐसी कौन सी स्थिति बन गयी कि जो जमीन दो करोड़ रुपए में ली गयी वो मिनट बाद साढ़े अठारह करोड़ रुपए की हो गई. दूसरी चीज क्या जितने प्रॉपर्टी डीलर है उनको ट्रस्टी महोदय संरक्षण दे रहे हैं. अयोध्या में जमीन विवाद से जुड़े ज्यादातर लोग हमें अपने घरों पे नहीं मिले. अयोध्या में कुसुम पाठक और हरीश पाठक के घर पे तालाबंद है. ये वे लोग हैं जिन्होंने दो करोड़ में बाघ की जमीन को दो लोगों को बेचा था जिन्होंने साढ़े अठारह करोड़ में राम जन्मभूमि ट्रस्ट को बेच दिया. बांस खरीदने वाले Sultan Ansari के घर भी हम पहुँचे लेकिन वहाँ हमें बताया गया कि वो सुबह से ही घर में नहीं आए यही हाल Ravi Mohan Tiwari के घर का था Ayodhya में ये Ravi Mohan Tiwari जी का बंगला है ये वो शख्स है जिन्होंने Kusum Pathak और Harish Pathak से उस बाघ को खरीदा है दो करोड़ में जिसे उन्होंने साढ़े अठारह करोड़ में Ram मंदिर trust को बेचा है हम यहाँ आए थे उनसे ये जानने के लिए कि आखिर क्या हुआ जो चंद मिनटों में उन्होंने साढ़े सोलह करोड़ रुपए का मुनाफा कमा लिया लेकिन बताया गया कि वो यहाँ पे मौजूद नहीं है इस मुल्क में भगवान Rama की हैसियत बहुत बड़ी है और अगर आबादी के लिहाज़ से देखें तो इस ज़मीन पर यीशु और पैगंबर Muhammad साहब के बाद वो सबसे बड़ी आबादी के आराध्य है इस धरती पे रहने वाले करोड़ों Hindu उनका नाम अपने नाम के आगे पीछे लगा के खुद को धन्य समझते है अगर ऐसे भगवान के मंदिर जन्म स्थान के नाम पे भ्रष्टाचार के आरोप लगे तो उनके चाहने वालों का दिल टूटता है ये मैं ही कहूँगा कि पहले तो जाँच हो यदि ये बात सही है तो उस पर कार्यवाही हो नहीं है तो जो लोग इस पर आरोप लगाए है उनके ऊपर कार्यवाही किया जाए उनके ऊपर मुकदमा किया जाए हर व्यक्ति ने एक एक रूपया भव्य और दिव्य Ram Janmabhoomi मंदिर निर्माण के लिए दिया है इस पैसे का किसी भी प्रकार का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए अगर किसी ने दुरुपयोग किया है अगर करने का कोशिश करता है तो इसकी जाँच हो और जाँच में जो लोग पाए जाए उनके ऊपर सख्त से सख्त कार्यवाही हो Ayodhya में आज भी Ram Janmabhoomi trust की meeting हुई लेकिन Champat Rai ने press का सामना नहीं और police सुरक्षा में चुपचाप निकल गए हाँ कल ज़रूर उन्होंने ये कहा था कि उन्हें इन आरोपों की परवाह नहीं ये गलत है हमको आरोप लगते ही रहते हैं मैं सौ साल से आरोपी देख रहे हैं हम लोग हम पर महात्मा Gandhi की हत्या के आरोप लगे आरोप से हम चिंता नहीं करते आपकी चिंता मत करिए आप खूब लगाइए you are yes I accept I ready you also you do it आप अपना काम करिए हम अपना काम करेंगे आपने देखा किस तरह ये खूबसूरत अमरूद की बाह एक बदसूरत विवाद का मुद्दा बनी है और ये विवाद कहाँ पे खत्म होता है अभी कुछ पता नहीं Ayodhya में Pramod Shrivastav और Rajesh Gupta के साथ Kamal Khan NDTV India और ब्रेक के बाद आपको दिखाएंगे दिल्ली में अब बस नाम का लॉकडाउन है. दिल्ली में लॉकडाउन लगभग खत्म हो गया है बस कुछ एक पाबंदियां रह गई है. सभी बाजारों शॉपिंग मॉल और शॉपिंग कॉम्प्लेक्स की सभी दुकानों को एक साथ खोलने की इजाजत दे दी गई है यही नहीं दो महीने के इंतजार के बाद पहली बार अब रेस्टोरेंट और सलून भी दिल्ली के अंदर खुल गए हैं. दिल्ली का दिल कहा जाने वाला कॉन्ट्रेस सोमवार उन्नीस अप्रैल के बाद पहली बार सोमवार चौदह जून को यहाँ सभी दुकानें एक साथ खुली चहल-पहल बढ़ी. थोड़ा सा इससे महामारी से निजात मिले अच्छा इसके लिए अपने आप को भी कॉन्फिडेंस करना था अच्छा तो थोड़ा शॉपिंग करने चले हैं इधर. द शॉपिंग करने आए हैं या घूमने आए हैं आप? नहीं कुछ शॉपिंग भी करनी थी थोड़ा सा घूमना भी था. तीन-चार महीने हो गए. आप फोन रिपेयर कराने आए हैं? जी हाँ. क्या लॉकडाउन में खराब हो गया था फोन? खराब हो गया था. अच्छा बंद पड़ा हुआ था ये तो काफी दिनों बाद आज खुला है अच्छा तो थोड़ी खुशी सी महसूस हुई है अच्छा तो ये हमारा मोबाइल ठीक हो जाए तो कितने दिन हो गए आपके फोन खराब हुए थे? एक महीना के आसपास अच्छा एक महीना तो लॉकडाउन में परेशान थे आप? बहुत ज्यादा परेशान है. हालांकि दुकानदार अभी आशावादी नहीं दिख रहे हैं. कोई आईडिया नहीं है इसका कोई प्रोडक्शन नहीं करे जा सकता. और ईवन के बाद आज पहला दिन ही है जब रेगुलर हुई है शॉप तो हाँ मुझे नहीं लगता इतने आराम से बूस्ट अप होगा. दो महीने के बाद पहली बार दिल्ली में रेस्टोरेंट खुले लेकिन पचास फीसदी कपॅसिटी के साथ लोगों ने लुत्फ उठाया रेस्टोरेंट्स मालिकों ने राहत की सांस ली. देखो अच्छा ही लगता है सबको हाँ क्योंकि एक बंधन सब तो घर में रहता ही है पर बेचारे है हमारे भलाई के लिए था वो हाँ पर फिर भी एक रिसेक्शन तो होती ही है जब वो जब रिलीज़ की जाती है तो अच्छा लगता है. नहीं दो-तीन दिन पहले से ही लोगों के फोन आने शुरू हो गए थे कि आपका खुल रहा है मंडे को खुल रहा है इस बार अनलॉक में खुल जाएगा नहीं खुल जाएगा हम आना चाहते हैं तो लोगों का तो है कि हम बाहर निकले बहुत दिनों से अंदर बंद है हाँ तो ये अच्छा स्वागत का योग्य है कि आज से खुल गया है. सो सुबह सरून खोलते ही लोगों ने बाल कटवाए दाढ़ी बनवाई दो महीने बाद हमसे हम लोग को two months हो गए last याद आ रहा है कब आप आए थे यहाँ पर अप्रैल first week में आया था मैं first week में अच्छा तो अभी क्या hair cut कराने आए हैं हाँ जी hair cut कराने आए हैं shaving कराने आए हैं जैसे ही हमने खोला तो काफी हमारे को calls आने लगी और काफी appointments आने लगी और clients जो walking client है वो भी काफी आने लगा तो हम कोशिश कर रहे हैं कि appointment basis पे ही बुलाए लोगों को जो लोग prefer भी कर रहे हैं तो हमारी यही कोशिश है कि आगे जब तक कोरोना है तो हम कोशिश कर रहे हैं कि अपॉइंटमेंट बेसिस पे ही बुला है तो ये बहुत जरूरी है इस भी था के जब दिल्ली के अंदर बाजार खोल दिए गए जब दिल्ली के अंदर दफ्तर खोल दिए गए तो जब दफ्तर और बाजार खोले हैं तो इंसान को ठीक-ठाक तो दिखना जरूरी है तो दो महीने से जो लोग ठीक-ठाक नहीं दिख पा रहे थे तो उनके लिए एक सहूलियत अब हो गई है कि सलून खुल गए हैं तो अपने आप को ठीक-ठाक आप करवा सकते हैं वो ठीक-ठाक करवा के अपने काम-धंधे पर आप जा सकते हैं. कुल मिलाकर दिल्ली में लॉकडाउन अब नाम का रह गया है लेकिन अगर लोगों ने कोरोना नियमों का नहीं किया तो सख्ती होने में भी देर नहीं लगेगी दिल्ली से Sharad Sharma NDTV India

Posted 2 months ago in Politics