सुप्रीम कोर्ट ने ऑक्सीजन सप्लाई और बंटवारे पर गठित की टॉस्क फोर्स

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सुप्रीम कोर्ट ने ऑक्सीजन सप्लाई और बंटवारे पर गठित की टॉस्क फोर्स
कोर्ट से देश में कोरोना संकट और ऑक्सीजन की कमी के मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल टास्क फोर्स का गठन किया है. नेशनल ऑक्सीजन टास्क फोर्स है ये जो देश में ऑक्सीजन की उपलब्धता और सप्लाई पर नजर रखेगा. नेशनल ऑक्सीजन टाइस फोर्स तर्कसंगत और न्याय संगत आधार पर राज्यों को ऑक्सीजन देने के लिए प्रक्रिया तैयार करेगी. आशीष भार्गव हमारे सीनियर एडिटर लीगल इस वक्त हमारे साथ जुड़ रहे हैं. आशीष इतने दिनों तक जो अदालत में ऑक्सीजन لے کر سنوائی چلی ہے اور اس میں جو چیزیں سامنے آئی ہیں. شاید یہ اسی کا نتیجہ ہے کہ اب ٹاسک فورس بنانا پڑا ہے? جی بالکل دیکھیے سپریم کورٹ نے کہہ بھی دیا تھا آہ سپر وار کو جو ہیرنگ ہوئی تھی کہ وہ آدھے جاری کرے گا اور سپریم کورٹ نے یہ بات صاف کی تھی کہ آہ وہ ایک کمیٹی کا گٹر کرے گا جو کہ کمیٹی ہوگی جس میں پرائیویٹ آہ جو ڈاکٹرز ہیں جو بہت بڑے بڑے انسٹی ٹیوٹ چلاتے ہیں ہسپتال چلاتے ہیں جن کو ایکسپرٹ مانا جاتا ہے. ان سب کو وہ شامل کرے گا سرکاری آہ ویشز سبوکر इसके साथ साथ Supreme Court ने ये भी कहा था कि Mumbai का जो model है oxygen को लेकर उसको समझने की जरूरत है कि आखिरकार इतने मरीज आने के बाद भी वहाँ पर oxygen की इतनी ah खपत कम क्यों है किस तरीके से वहाँ पर काम किया जाता है तो oxygen का audit करना इस देश में बहुत जरूरी है छह महीने के लिए बारह लोगों की ये committee बनाई है देश भर के अस्पताल जो है वो ah अस्पताल और जो circuit है वो इस committee की मदद करेंगी एक हफ्ते के भीतर ये committee जो है special task task force इसका नाम दिया गया है वो अपना काम शुरू कर देगी तो काफी अहम है इस मोड़ पर जब देश भर में oxygen का संकट है और ऐसे में oxygen ah किस तरीके से सभी राज्यों को सही तरीके से पहुँचाया जाए उसका आवंटन किया जाए supply ah सही तरीके से हो और उतनी supply हो जितनी उसको जरूरत है ah ये काफी बड़ी बात है यहाँ पर rationalize करने की बात Supreme Court बार बार कर रहा था के तत्संगत रूप से ah oxygen का इस्तेमाल हो उसको उतना ही आवंटन किया जाए जितनी oxygen को जरूरत है ये काफी महत्वपूर्ण है ऐसे समय में जब लोग oxygen के अभाव में ah मर रहे है तो ah ये कदम उठाना काफी जरुरी Supreme Court को लगा था ah फौरी तौर पर क्योंकि पूरे देश में धीरे धीरे दिल्ली का मामला आया था फिर कर्नाटक का मामला आया और ये एक ऐसा मामला लेकिन अगर अगर आप हमारे दर्शकों को ये समझा सके अभी फिलहाल जो आवंटन का काम होता है वो केंद्र सरकार के जरिए हो रहा है तो ये जो task force है क्या ये report Supreme Court में दाखिल करेगी उसके बाद Supreme Court ah direct करेगी सरकार को कि कैसे आवंटन करना है क्या प्रक्रिया क्या होगी और कितनी जल्दी शुरू होगा ये? जी देखिए अभी तक जो formula था वो चार ah लोगों का formula था जिसमें चार बड़े लोग ah शामिल थे केंद्र सरकार की ओर से ah लेकिन वो जो formula था उसको नकार दिया Supreme Court ने भी कि ये formula सही नहीं है क्योंकि उसमें per oxygen per bat ah दस litre oxygen की बात थी per minute की बात थी और चौबीस liter per minute ice آکسیجن کے لیے تھی. تو اس کو نکال دیا تھا سپریم کورٹ نے اور یہ اب یہ کہا ہے کہ یہ آہ دونوں کو رپورٹ سونپے گا. سندھ سرکار کو بھی ریکویسٹ آف پیکجز ٹاسک فورس اور سپریم کورٹ کو بھی سونپے گی اور اپنی سفارش بھی دے گی کہ ان سرکار کو کہ کس طریقے سے کتنی آکسیجن کے سٹیٹ کو آپ کو آہ دینی ہیں اور یہ ایک ہفتے کے وتر یہ کام کرنا شروع کر دے گی? ہمم. کہ یہ سپریم کورٹ نے کہا کہ ترنت اسے شروع کر دینا چاہیے. بہت شکریہ آپ کا عاشق اس پوری جان کاری کے لیے. ویسے دہلی میں کرونا کے نئے معاملے میں اب کمی دیکھنے کو مل رہی ہے تازہ آنکھڑے آئے ہیں دہلی میں پچھلے چوبیس گھنٹے میں سترہ ہزار تین سو چونسٹھ کیس تو کرونا سنکرون کے سامنے آئے. پچھلے چوبیس گھنٹے میں تین سو بتیس مریضوں کی موت بھی ہوئی ہے. سنگرمن درد دلی میں کم ہو کر تئیس تشملہ تین چار فیصدی ہوگئی ہے جو پچھلے تین ہفتوں میں سب سے کم ہے. دہلی میں ایکٹیو مریضوں کی سنکھیا اب ستاسی ہزار نو سو سات ہے. دہلی میں کرونا وائرس کا ریکوری ریٹ جو مریضوں کی ریکوری ریٹ ہے وہ اکیانوے دس ملاؤ آٹھ تین فیصدی ہے. और इस सबके बीच DRDO ने एक दवा डेवलप की है एंटी कोविड दवा है ये इसका नाम two deoxide glucose है जिसे मंजूरी भी मिल गई है DCGI ने आपात इस्तेमाल के लिए इस दवा को मंजूरी दी है ये दवा में आएगी और इसे पानी में घोल कर पिया जा सकता है तेजी से रिकवरी में मदद करेगी ये दवा साथ ही oxygen पर जो निर्भरता है उसे भी कम करेगी और इस पर और जानकारी दे रहे हैं हमारे सहयोगी Parimal Kumar. DRDO ने एक drug का इजात किया है जो लोग अस्पताल में एडमिट है कोरोना के मरीज वो उसमें कारगर है करीब साल भर से इस पर काम चल रहा था और डीआरडीओ के एक लैब ने डॉक्टर रेडीज अ लेबोरेट्री के साथ मिल के इस ड्रग को तैयार किया है. डीसीजीआई ने जो ड्रग कंट्रोल जनरल ऑफ इंडिया है उन्होंने इमरजेंसी यूज अप्रूवल इसको दे दिया है ये शासक के फॉर्म में होगा यानि पाउडर के फॉर्म में होगा और इसको पानी के साथ जो है अ इस दवाई को ओरली लिया जा सकता है और इसमें ये दावा किया गया है और trial में ये पाया गया है कि इस drug को लेने के बाद आपको oxygen की जरूरत कम हो जाती है घटती है आपकी recovery बहुत जल्दी होती है आप RTPCR आपका आपकी जो report है वो negative जल्दी आती है यानी आप जल्दी स्वस्थ होते है और खास तौर पे ये उन मरीजों को दिया जा सकेगा जो मरीज अस्पताल में admit है यानी जो moderate या severe category के मरीज है उनको दिया जा सकता है साल भर के शोध के बाद अब इसको आखिरकार जो है drug control general of India ने दे दी है बहुत कम ah आज के दौर में ऐसी ऐसी दवाइयाँ है जो कोविड के मरीजों को लेकर है और उस लिहाज से अगर ये माना जाए तो एक बड़ी उपलब्धि है जिसमें DRDO को ये कामयाबी हासिल हुई है और खास तौर पे उन मरीजों की मुसीबतें कम होंगी जिस तरीके से आज के दौर में oxygen को oxygen को लेकर मांग बढ़ रही है ah मरीजों को oxygen की ज्यादा जरूरत पड़ी है अस्पतालों में और उसको लेकर हाय तौबा मची हुई तो ऐसी सूरतें हाल में इसमें ये कहा गया है कि oxygen की जरूरत को कम करता है तो धीरे धीरे शोध और खोज जो है वो जारी है और इससे जो आने वाले दौर में है ah जो आने वाला दौर होगा उसमें मरीजों को मदद मिलेगी नई दिल्ली से Parimal Kumar NDTV India और कोरोना मरीजों के अस्पताल में दाखिले को लेकर राष्ट्रीय नीति में बदलाव किया गया है अब अस्पताल में दाखिले के लिए पॉजिटिव रिपोर्ट जरुरी नहीं होगी अब तक अस्पताल में भर्ती होने के लिए कोरोना पॉजिटिव रिपोर्ट अनिवार्य थी. केंद्र सरकार ने अब तीन दिनों में सभी राज्यों में इसे लागू करने का आदेश दिया है. और इस और जानकारी दे रहे हैं हमारे सहयोगी Parimal Kumar कोरोना के मरीजों को अस्पताल में दाखिला देने को लेकर अब नेशनल पॉलिसी में बदलाव किया गया है. अब कोई रिपोर्ट अस्पताल में देने की जरूरत नहीं है. जिस रिपोर्ट के आधार पर अस्पताल पहले एडमिशन दिया करते थे. अब इन मरीजों को अ अस्पताल में सस्पेक्टेड वार्ड में एडमिट किया जा सकेगा. और इसको लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों के चीफ सेक्रेटरी और केंद्र शासित प्रदेशों के चीफ सेक्रेटरी को चिट्ठी लिखी और कहा है कि तीन दिन के भीतर ये नीति अमल में लाएं. और इसमें सीधे तौर पे कहा गया है कि किसी भी मरी को राज्य के आधार पर या उनके Voter I card के आधार पर ये पहचान पत्र के आधार पर दाखिला देने से मनाही नहीं करनी होगी और इसमें कोविड केयर सेंटर हो या डेडीकेटेड अ कोविड हेल्थ फैसिलिटी हो या डेडीकेटेड कोविड हॉस्पिटल हो वहाँ पे दाखिले में कोई अड़चन ना आए ये सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है. अब तक ये होता था कि आप जब तक पॉजिटिव रिपोर्ट लेकर नहीं जाते थे कोविड को तब तक दाखिला नहीं मिलता था. लेकिन अब ये कहा गया है कि अब कोई भी अगर इस तरह की शिकायत लेकर पहुँचता है जिसको जरूरत है हॉस्पिटल की और कोरोना के सिम्टम है तो उनको सस्पेक्टेड वार्ड में अडमिशन दिया जाए. और सीधे तौर पर ये उस बात को लेकर है कि जिस तरीके से अ जो बीमारी फैली है अभी उसके मद्देनजर कल भी स्वास्थ्य मंत्रालय ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि कुछ एक लक्षण अगर आपने है जो कोविड के लक्षण है तो आप उसको इस दौर में कोरोना ही मानिए. ऐसी सूरत-ए-हाल में जिनको जरूरत लग रही है कि अस्पताल में दाखिले की जरूरत है. अब उनके सामने ऐसी कोई अड़चन नहीं आएगी कि उनको कोविड पॉजिटिव रिपोर्ट ले के जानी होगी इस बात के मायने ये भी है कि अब तक report को लेकर लोगों को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है जगह जगह पर और बीमारी तब तक बढ़ती चली जाती है ऐसी सुरते हाल में अब स्वास्थ्य मंत्रालय ने national policy में बदलाव किया है Varanasi को मोक्ष की नगरी कहा जाता है लेकिन आजकल वहाँ हर तरफ मौत पसरी हुई है शमशान घाटों से लेकर अंतिम क्रिया का सामान बेचने वाली दुकानों तक से पता चलता है कि कितने लोगों की जान जा रही है नगर निगम के कर्मचारी बताते है कि पिछले कुछ दिनों में उन्होंने जितने मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किए उतने पहले कभी नहीं किए। हमारे सहयोगी Ajay Singh की report. Varanasi के Sigra इलाके में Shiv मंदिर के पीपल पर पहले यदा कदा ही मिट्टी के बने घंट श्राद्ध के लिए नजर आते थे लेकिन देखिए अब ये हाल है चारों तरफ श्राद्ध कर्म करने के लिए घंट ही नजर आ रहे है नीचे लोग अपनी अपनी बारी से श्राद्ध कर्म कर रहे है customer से पहले का नजारा तो बहुत कम था दो एक लोग इसमें खाली बाँधते थे बहुत कम था इस समय तो एकदम बहुत बुरी स्थिति हो गयी देखने को पहली बार मिला है इतना धन। नहीं ऐसा नहीं था संक्रमण के पूर्व जो है एकाद आता था लेकिन जब से संक्रमण हुआ है तब से बारह, तेरह ऐसे लगातार बढ़ते जा रहे हैं। पहले एक आध आते थे और आज बारह तेरह हो रहे हैं, कभी चौदह हो जा रहा है, कभी सोलह, सोलह हो जाता है। तो इससे आंकड़े बढ़ते नजर आ रहे हैं। Manduadih इलाके में कफन दफन बेचने की यह दुकान दशकों पुरानी है. कोरोना से पहले रोज इक्का-दुक्का लोग ही आते थे लेकिन आजकल तो यह संख्या चालीस तक पहुँच जा रही है. बहुत ज्यादा बढ़ गई है. आम दिनों में क्या रहा कैसा था आम दिनों में जैसे महीने में दो चार छह दस हो जाते बहुत दस पंद्रह हो जाते थे अब क्या है कि per day आपका पच्चीस तीस चालीस दस पंद्रह चार में कहीं मिली नहीं है सारे चीज की stock खत्म हो गयी है हाँ सब कफन सीढ़ी इसमें पूरा सब माल खतम हो जाएगा रहा है कपड़े वपड़े सब कही कुछ नहीं मिले घाट पे सीढ़ी लकड़ी भी नहीं मिल रही है नगर निगम के जन्म और मृत registration विभाग के कर्मचारियों ने पहले कभी इतने प्रमाण पत्र जारी नहीं किए थे जितने आजकल हो रहे है दरअसल फरवरी और फिर मार्च से मौतों का आंकड़ा बढ़ने लगा था तब दो हजार के आसपास प्रमाण पत्र जारी हुए थे अप्रैल में ये संख्या तेजी से बढ़ी नौ सौ प्रमाण पत्र जारी हो चुके है जबकि अभी छह मई तक पंद्रह सौ मृत्यु प्रमाण पत्र बनाना बाकी है इस समय मृत्यु के आँकड़े तो काफी बढ़ गए है इस ah दिनों के अलावा जो है सामान्य दिनों से जो है इस समय काफी संख्या बढ़ गयी है और हमारे ख्याल से zone से चालीस पचास का आ रहा है मृत्यु का कम से कम per day आ जाता है दो से ढाई सौ आठ हो जा रहा है Kashi मोक्ष की नगरी रही है यहाँ लोग आखरी वक्त में आते रहे है लेकिन ऐसा पहली बार हुआ जब ये मोक्ष की नगरी अपने ही लोगों की इतनी मौतों से सहम गयी है Varanasi से Anuj और Gaurav Dwivedi के साथ Ajay Singh NDTV India और ग्यारह हजार कोरोना मामलों से सीधे तीन हजार चार हफ्तों में ही मुंबई में बहत्तर फीसदी संक्रमण के मामले कम हो गए. सबसे अहम बात ये है कि ऑक्सीजन की कमी ना हो इसकी तैयारी कोरोना की पहली लहर के दौरान ही कर ली गई थी. मुंबईकरों की साँस बचाने की मुहिम BMC ने पिछली लहर से ही शुरू कर रखी थी ये है liquid oxygen storage tank और दूसरी तरफ है oxygen generating plant liquid oxygen storage tank Mumbai के बीस अस्पतालों में पिछले साल मई June महीने में ही fit किए गए थे तेरह हज़ार kilo litre वाली liquid medical oxygen tank शहर के तेरह अस्पतालों में fit किए गए दो अस्पतालों में दस हज़ार और पाँच अस्पतालों में छह हज़ार kiloliter वाले storage tank के साथ ही Mumbai के अस्पताल refill mode से हटकर storage supply mode में लाए गए BMC के दो additional commissioners के कंधों पर पूरी जिम्मेदारी डाली गयी। स्वास्थ्य से जुड़ी हर संकट जहाँ health के additional commissioner Suresh Kakani हल कर रहे है तो oxygen management का पूरा ज़िम्मा projects विभाग के Additional Municipal Commissioner P Weller को दिया गया बड़ा बड़ा hospital में double double टाकी बिठाया उसका क्या फायदा हुआ? हमारा tanker late आ गया तो भी हमको problem नहीं हुआ। stock में आप stock में था। Delhi में मैं मैंने देखा उसमें एक समझ आ रहा है उसको back to back चल रहा है उसका tanker आने के लिए late हो रहा اپنا پاس یہ آہ ہم نے اتنا بیس ٹینک بٹھائے اس میں بہت اپنا کو یہ فائدہ ملا ہم تھوڑا رسک لیا. اس میں خرچہ تو ہوا. ہاں اس کو لیکن اپروول لے کے ہم آگے جا کے اس کو پورا فٹ کر دیا. سو وہ فٹ کرنا ایک بات تو آٹھ نو مہینہ تو ہم کو وہ یوز میں نہیں آیا تھا جو اس میں نہیں آتا ہم کو بھی لگ رہا تھا یہ ویسٹ فل ایکسپنڈیجر ہو گیا. بٹ یہ سیکنڈ ڈویژن ہے وہ پورا کام آ گیا. اس کو جیسے ہم ہمارا کہیں بھی کچھ پرابلم نہیں ہوا. ممبئی شہر کو نویں ممبئی کے دو ری فلنگ سٹیشنوں سے آکسیجن ملتی ہے. اپریل کے دوسرے ہ में refilling में गड़बड़ी हुई साथ ही शहर की oxygen का कुछ हिस्सा दूसरे जिलों में भेजा गया Mumbai में अफरा तफरी देखी गयी सत्रह अप्रैल को एक सौ अड़सठ मरीजों को आनन फानन में ज्यादा oxygen storage वाली facility में transfer किया गया FDA action में आयी Mumbai का दो सौ चालीस metric ton का कोटा तय हो गया BMC ने refilling स्टेशनों पर oxygen inspector तैनात कर दिए उधर अस्पतालों में oxygen की खपत सीमा में रहे इसलिए शहर के हर में ऑक्सीजन नर्स को अपॉइंट किया गया. और हमने निजी अस्पतालों को भी हम सप्लाई के लिए उनको भी चैनलाइज कर रहे हैं. उनकी अगर सप्लाई खत्म होता है तो हमने उनको बोल रखा था कि सोलह घंटे पहले हमको बता दो. अगर आपका सप्लाई नहीं दे पाया तो हम आपको सप्लाई करने की कोशिश करेंगे. हमारा डिस्चार्ज भी बड़ा, हमारा सीएफआर भी कम हुआ जब केस फैटिटिट रेड है, जो मौत के जो संख्या है वो भी कम हो रही है. हवा से ऑक्सीजन बनाने वाली ऐसी ऑक्सीजन जनरेटिंग प्लांट भी मुंबई में दो जगह फिट है. जिनसे दो हजार दो सौ चालीस क्यूब मीटर ऑक्सीजन हर दिन बनता है. तीसरी लहर के अंदेशे को देखते हुए अब ऐसे सोलह ऑक्सीजन जनरेटिंग प्लांट लगाए जा रहे हैं. ताकि शहर के पास अपना ऑक्सीजन हो. मुंबई से पूजा भारद्वाज एनडीटीवी इंडिया के लिए. कई तरह के सवाल है जो निश्चित ही दूसरे मुद्दों की रजाई में कहीं प्रधानमंत्री ने चुनाव में क्यों कहा कि काला धन आएगा तो हर नागरिक को तीन तीन लाख रुपए मिलेंगे Muzaffarnagar की घटना समाज की घोर नाकामी है तो सरकार की घनघोर जी की राजनीति इतनी नाटकीय हो जाती है कि कभी विरोधी से लेकर सरकार सब दो चार दिनों के लिए प्याज बेचने लगते है Gandhi की तरह सादा हो जाने की हमारे नेताओं में गज़ब की चाहत है बस लगता है कि उन्होंने Gandhi की जो किताब पढ़ी है उसका cover कुछ ज़्यादा ही रंगीन दंगा कभी होता नहीं है ये कराया जाता है ये कहा जाता है

Posted 1 month ago in Social Issues